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  • भ्रष्टाचार और काले धन के समाधान के लिए इच्छा शक्ति (02-मई,2017)
  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का सिलसिला (02-मई,2017)
  • ग्रामीण स्वास्थ्य प्रबंधन (02-मई,2017)
  • के. विश्‍वनाथ –भारतीय सिनेमा के लब्‍ध प्रतिष्ठित व्‍यक्ति (02-मई,2017)
  • भारतीय अर्थव्यवस्था परिवर्तन के शिखर पर

    (01-मई,2017)
 
विशेष सेवा और सुविधाएँ

समावेशी विकास के माध्यम से ग्रामीण बदलाव

 

विशेष लेख

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http://pibphoto.nic.in/documents/rlink/2017/may/i201752009.jpg

*विनोद बहल

       वित्तीय बाधाओं के बावजूद, एनडीए सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास के इंजन के रूप में विकसित करने पर लगातार अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण आवास और बुनियादी ढांचे, खेतिहर आय, रोजगार सृजन और उद्यमिता से संबंधित अनेक प्रमुख पहलुओं / पुनरुत्थान नीतियों के माध्यम से ग्रामीण गरीबों का उत्थान करना है।

      मोदी सरकार के ग्रामीण विकास कार्यक्रम का एजेंडा इसके विकास मंत्र- "सबका साथ, सबका विकास' (समावेशी विकास) के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास का लाभ गरीब और वंचित वर्गों तक पहुंचे। लोगों ने हाल ही हुए विधानसभा चुनाव में सरकार के इस विकास मॉडल पर अपनी सहमि की मुहर भी लगा दी है।

      ग्रामीण विकास के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए सरकार ने बजटीय आवंटन से अपने इरादे जाहिर कर दिए थे और ग्रामीण विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया।  संप्रग शासन के दौरान 2013-14 के बजट में जहां ग्रामीण विकास के लिए 80194 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था, वहीं राजग सरकार के दौरान वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान इसे बढ़ाकर 87765 करोड रुपये कर दिया गया और ग्रामीण, कृषि और संबधित क्षेत्रों के लिए 1.87 लाख करोड़ रूपये का आवंटन किया गया।

      सरकार ने इस बात को पूरी तरह से स्वीकार किया है कि आवास और बुनियादी सुविधाएं आर्थिक विकास के मुख्य वाहक हैं, एनडीए सरकार ने शुरुआत से ही अपने पहले बजटीय आवंटन में इस पर ध्यान केंद्रित किया। सरकार ने 2014-15 के अपने अंतरिम बजट में राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) के आवंटन में 8,000 करोड़ रुपये तक की बढ़ोत्तरी कर दी जिसका प्रमुख लक्ष्य सरकार के अग्रणी कार्यक्रम '2022 तक सभी के लिए घर' को सहायता प्रदान करना है।

      12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए ग्रामीण आवास के कार्य समूह के अनुसार, 2015 तक 14.8 मिलियन घरों की कमी थी। ग्रामीण आवास को प्राथमिकता देने की झलक सरकार के बजटीय आवंटन में देखने को मिली। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बजटीय आवंटन को 15000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 23000 करोड़ रुपये कर दिया गया है और 2017-18 के लिए बेघर लोगों को एक करोड़ घर देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री योजना के तहत एक विशेष ब्याज सब्सिडी प्रदान की जा रही है जिसका उद्देश्य लक्ष्य आवास को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से ग्रामीण भारत में कम आय वर्ग के लोगों को कम लागत पर आवासीय सुविधा प्रदान करना है।

      ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत परियोजना आधारित बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी अर्बन मिशन की शुरूआत की गयी। इसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत गांवो को सड़क से जोड़ने के लिए 14389 करोड़ रुपये का एक अलग बजटीय आवंटन किया गया।

      दीन दयाल उपाध्याय ज्योति योजना के साथ मोदी सरकार लोगों के जीवन को रोशन कर रही है। इस योजना का लक्ष्य सस्ती दरों पर बिजली प्रदान करना और बिजली की आपूर्ति बढ़ाने के लिए हरित ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना है। 2017- 18 के बजट में सरकार ने मई 2018 तक सभी गांवों का विद्युतीकरण करने का लक्ष्य रखा है। 2016-17 में हरित ऊर्जा की क्षमता में 50 जीडब्ल्यू की क्षमता स्थापित करके सरकार ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है जो लगभग तापीय ऊर्जा के बराबर है। सरकार का लक्ष्य 2022 के अंत तक अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता को 175000 मेगावाट के स्तर पर पहुंचाने का है।

      सस्ती ऊर्जा सरकार का प्रमुख विषय है। गरीब परिवारों के लिए शुरू की गयी 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (पीएमयूवाई) के शुरूआती एक वर्ष के दौरान दो करोड़ बीपीएल परिवारों को पहले ही एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं और मार्च 2019 तक लगभग सभी बीपीएल परिवारों को इस योजना के तहत कवर कर लिया जाएगा।

      बेघरों की समस्या से निपटने के अलावा, सरकार ग्रामीण इलाकों में कृषि की गंभीर समस्या के निवारण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार का मानना है कि कृषि विकास के माध्यम से गरीबी से निपटा जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) की ग्रामीण विकास रिपोर्ट 2016 में कहा गया है कि कृषि, गरीबी उन्मूलन के लिए मूल्य प्रोत्साहन, खेतिहर आय में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्रालय और सहयोगी सेवाओं ने 2017-18 में रिकॉर्ड 187233 करोड़ रुपये का आवंटन किया। यह किसानों को उनकी फसल का एक बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ईन्नाम) पर कार्य कर रहा है। इसका लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना है। इस तरह की कई अन्य योजनाओं की शुरूआत की गयी है कि जिसमें किसानों को व्यापक फसल बीमा उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2016-17 में फसल कवरेज क्षेत्र के लक्ष्य में 30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर 2017-18 में 40 प्रतिशत और 2018-19 में 50 प्रतिशत फसल क्षेत्र को शामिल करना है। मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, तकनीक का उपयोग करके, 50,000 ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण कार्यक्रमों उपक्रमों द्वारा और 2017-18 में दीर्घकालिक सिंचाई कोष में 40,000 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी है।  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत पांच साल में हर क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

      ग्रामीण संकट का मूल कारण आय में कमी होना है। आय बढ़ाने के प्रमुख लक्ष्य के साथ सरकार ने रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्यमिता से संबंधित कई कार्यक्रमों की शुरूआत की है। नए विशिष्ट लक्ष्य (2019) योजना के तहत, 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' द्वारा सरकार महिला स्वयं समूहों की मदद करने और 7 करोड़ ग्रामीण बीपीएल परिवारों को टिकाऊ आजीविका प्रदान करने पर पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तांकि इनके जीवन स्तर में सुधार किया जा सके। मनरेगा का पुर्नगठन किया गया है और वित्तीय वर्ष 2017 के लिए रिकॉर्ड 48000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो सीमांत किसानों और भूमिहीन मजदूरों के लिए आय का एक प्रमुख साधन है। एक अनुमान के मुताबिक 2013-14 के वित्तीय वर्ष के दौरान जहां 25-30 लाख कार्य पूरे किए गए वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 51.3 लाख कार्य पूरे किए गए। इसके अलावा ग्रामीण विकास मंत्रालय अपनी कमियों की जांच करने और मनरेगा के तहत वास्तविक संपत्ति का पता लगाने के लिए उपग्रह आधारित भू- टैगिंग का उपयोग कर रहा है। शहरी और ग्रामीण गरीबों द्वारा बड़ी संख्या में खोले गए जनधन बैंक खातों में 96 फीसदी मनरेगा मजदूरों को अब प्रत्यक्ष लाभ योजना के तहत उनकी मजदूरी सीधे खातों में हस्तांतरित की जा रही है। 2013-14 में यूपीए के कार्यकाल के दौरान यह आंकड़ा केवल 13 फीसदी था।

      कौशल विकास कार्यक्रम 45 लाख परिवारों को कवर कर रहा है और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। यह प्रमुख कार्यक्रम ग्रामीण उद्यममियों को बढ़ावा देने के लिए ऋण उपलब्ध कराता है। अंसगठित क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाली इस योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2018 में इसके तहत रिकॉर्ड 1.80 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। ग्रामीण उद्यमियों को सस्ते यात्री वाहन उपलब्ध कराकर युवाओं को वैकल्पिक रोजगार प्रदान किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, सरकार  अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को बेचने के लिए आजीविका स्टोर खोलने की योजना बना रही है।

      समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए, सरकार का लक्ष्य मार्च 2019 तक 55,000 से अधिक गांवों को मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना है। सरकार का लक्ष्य जनधन खाते, डेबिट कार्ड, आधार पे, भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम) को जन-जन तक पहुंचाना है ताकि लोगों को डिजिटल लेनदेन के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। वित्तीय वर्ष 2017 में जनवरी तक डिजिटल लेन-देन करने वालों की संख्या 1569.3 करोड़ हो गयी थी। 2017-18 में डिजिटल लेन-देन का लक्ष्य 2500 करोड़ रुपये है।

आश्रय, आजीविका, सस्ती बिजली की आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता (शौचालय सहित) और रसोई गैस प्रदान करने के माध्यम से सरकार ने 22 करोड़ ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। प्रधानमंत्री का मुख्य ध्यान नौकरशाही पर है और इसके लिए प्रधानमंत्री नौकरशाहों के साथ मासिक समीक्षा बैठक करते हैं और शासन प्रणाली की खामियों को दूर करना इसका लक्ष्य है तांकि सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों को मिल सके।

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*लेखक पत्रकार हैं और दिल्ली में कार्यरत हैं । नियमित रूप से रियल स्टेट से संबंधित मुद्दों पर प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में नियमित रूप से लिखते रहे हैं। लेख में व्‍यक्‍त विचार लेखक के निजी विचार हैं।

 

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जीवाई/kकेजे-83

 

 



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