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हिंदी विज्ञप्तियां
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- प्रधानमंत्री कार्यालय
- राष्ट्रीय सुरक्षा पर गठित कार्यबल ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी
- इस्पात मंत्रालय
- भारत और ऑस्ट्रेलिया ने इस्पात क्षेत्र में
व्यवसाय पर विचार विमर्श किया
- इस्पात मंत्री ने एनएमडीसी के कार्य निष्पादन की समीक्षा की
- उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, खाद्य और सार्वजनिक वितरण
- केन्द्र ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अनाजों
के छह माह पूर्व आबंटन का प्रस्ताव दिया
- कानून एवं न्याय मंत्रालय
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की गड़बड़ी
- न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों की जानकारी
- न्यायिक सेवा में भर्ती की एक-समान नीति
- ग्राम न्यायालयों का कार्य प्रदर्शन
- ग्रामीण विकास मंत्रालय
- स्वच्छता और पेयजल संबंधी राष्ट्रीय सम्मेलन
- गृह मंत्रालय
- यात्रियों की सुविधा के लिए आईवीएफआरटी परियोजना का विकास
- गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जम्मू-कश्मीर के वार्ताकारों की रिपोर्ट
सरकार ने सुविज्ञ बहस का स्वागत किया
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- सौर-ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश के लिए डॉ. फारूख अब्दुल्ला का
औद्योगिक घरानों से आह्वान
- नागर विमानन मंत्रालय
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण-एएआई (दिल्ली हवाईअड्डा-केस अध्ययन) द्वारा पीपीपी परियोजनओं के क्रियान्वयन पर मसौदा निष्पादन लेखा रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय
- श्रीमती मीरा कुमार पर 6, कृष्णा मेनन मार्ग स्थित
बंगले की कोई देनदारी नहीं
- मंत्रिमंडल सचिवालय
- इस्पात मंत्रालय के अधीन बर्ड ग्रुप ऑफ कंपनी का पुनर्गठन
- महिला और बाल विकास मंत्रालय
- मानव तस्करी रोकने के मुद्दे पर केन्द्रीय समिति की बैठककेन्द्र, राज्यों और गैर-सरकारी संगठनों की मिली-जुली पहल पर जोर दिया गया
- युवा मामले और खेल मंत्रालय
- खेल मंत्रालय ने तीन सदस्यीय भारतीय तैराकी टीम को प्रशिक्षण हेतु
ओलम्पिक प्रशिक्षण केन्द्र, जर्मनी भेजने के लिए मंजूरी दी
- ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई करने वाले बैडमिंटन खिलाडियों
की तैयारी के लिए खेल प्रतियोगिताओं को मंजूरी
- योजना आयोग
- गरीबी के आकलन के लिए सरकार ने नए
विशेषज्ञ पैनल की घोषणा की
- वित्त मंत्रालय
- वित्त वर्ष 2012-13 के लिए सामान्य भविष्य निधि-जीपीएफ और विशेष जमा योजनाओं-एसडीएस पर दी जाने वाली ब्याज दरों में संशोधन
- शहरी विकास मंत्रालय
- भारत और जापान शहरी परिवहन क्षेत्र में मिलकर काम करें – कमलनाथ
- संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- गुरू पुष्य नक्षत्र पर दिल्ली डाक सर्किल द्वारा सोने की खरीद पर
साढ़े 6 फीसदी छूट की पेशकश
- संसदीय कार्य मंत्रालय
- संसद के बजट सत्र 2012 में 21 विधेयक पारित सरकार लोकपाल विधेयक भी पास करना चाहती थी- पवन कुमार बंसल
- संसद की 15वीं लोकसभा के 10वें सत्र और राज्यसभा के 225वें सत्र (बजट सत्र)
के दौरान हुआ विधायी कामकाज
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योजना आयोग24-मई, 2012 20:53 IST
गरीबी के आकलन के लिए सरकार ने नए
विशेषज्ञ पैनल की घोषणा की
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तेंदुलकर समिति की विधियों का अनुसरण कर वर्ष 2009-10 के लिए राज्यवार गरीबी रेखा और गरीबी अनुपात परिकलित कर ली गयी है। इसी विधि के आधार पर, योजना आयोग ने प्रेस नोट के जरिए 19 मार्च, 2012 को गरीबी का आकलन जारी किया है। इसके अनुसार देश में गरीबी का अनुपात, वर्ष 2004-05 में 37.2 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2009.10 में 29.8 प्रतिशत हो गया। नतीजतन, देश में गरीबों की संख्या वर्ष 2004-05 में 40.7 करोड़ से घटकर वर्ष 2009.10 में 35.5 करोड़ रह गयी। तेंदुलकर समिति ने 2009 में सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में खर्च की उपयुक्तता को मानकस्तर से हटाकर पोषण संबंधी करार दिया था। इसमें कहा गया कि कैलोरी मानक से हटकर प्रस्तावित गरीबी रेखा को पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति वास्तविक निजी खर्च की उपयुक्तता की जांच करके ही मान्य किया गया है। देश में गरीबी के पुनर्आकलन और सम्बन्धित विधियों की आवश्यकता के संदर्भ में आए विभिन्न्विचारों, और गरीबों की पहचान के लिए उपयुक्त विधि का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ तकनीक समूह गठित करने का फैसला लिया है।
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष डॉ्. सी. रंगराजन की अध्यक्षता में तकनीक समूह में जानेमाने अर्थशास्त्रियों को शामिल किया गया है।
1- डॉ. सी. रंगराजन, अध्यक्ष अध्यक्ष
प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद
2- डॉ. महेन्द्र देव, निदेशक सदस्य इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान
3- डॉ. के सुन्दरम, सदस्य दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स के पूर्व प्राध्यापक
4- डॉ. महेश व्यास, भारती सदस्य अर्थव्यवस्था निगरानी केन्द्र
5- डॉ. के.एल. दत्ता, पूर्व सलाहकार सदस्य, संयोजक
योजना आयोग विशेषज्ञ तकनीक समूह की संदर्भ शर्तें इस प्रकार हैं -
1- गरीबी रेखा का आकलन करने की मौजूदा विधि का समग्ररूप से समीक्षा करना और ये जांच करना कि क्या गरीबी रेखा को उपभोग के संदर्भ में तय कर देना चाहिए या अन्य विधियां भी प्रासंगिक हैं और यदि ऐसा है तो शहरी और देहाती इलाकों में गरीबी का अनुमान लगाने वाला एक आधार तय करने के लिए क्या दोनों को प्रभावी तरीके से जोडा जा सकता है।
2- एनएसएसओ पर आधारित उपभोग अनुमान और नेशनल अकाउंटस एग्रिगेटस से निकली विधि पर असहमति के मुददों की जांच करना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए सीएसओ द्वारा जारी राज्यवार नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का इस्तेमाल करते हुए उपभोग गरीबी रेखा के नवीकरण के लिए उपयुक्त तरीके का सुझाव देना।
3- गरीबी रेखा का आकलन करने केलिए वैकल्पिक विधियों की समीक्षा जो अन्य देशों में प्रचलित है, और यह संकेत देना कि क्या इस आधार पर भारत में गरीबी का आकलन करने के लिए एक खास विधि ईजाद की जा सकती है, जिसमें समय-समय पर इसके नवीकरण के लिए भी विधियां शामिल हैं।
4- यह सिफारिश करना कि भारत सरकार के तहत चल रही योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए योग्यता तय करने में उपर्युक्ततरीके से ईजाद की गई गरीबी के आकलन का कैसे इस्तेमाल हो।
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वि. कासोटिया/अनिल/दयाशंकर - 2572
(Release ID 15739)
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